मन के बाग़ में बिखरी है भावनाओं की ओस। …………कुछ बूंदें छूकर मैंने भी नम कर ली हैं हथेलियाँ …………और लोग मुझे कवि समझने लगे!

किसी ईश को प्रणाम मत कीजिये

नानक, कबीर, महावीर, पीर गौतम को
पंथ, देश जातियों का नाम मत दीजिये
जिसने समाज की तमाम बेड़ियाँ मिटाईं
उसे किसी बेड़ी का ग़ुलाम मत कीजिये
मन के फ़क़ीर, अलमस्त महामानवों को
रुढ़ियों से जोड़ बदनाम मत कीजिये
मानव के प्रति प्रेम ही प्रभु की अर्चना है
भले किसी ईश को प्रणाम मत कीजिये

9 comments:

kanchan said...

एक बार फिर लाजवाब है जी

shruti said...

sahi kaha chirag ji
bhagwan bhakti ka nahi maanaviya samvednao ka bhookha hai

AAS said...

chirag ji

aadmi kitni bhi koshish kar le
in mahaporishon ki chhavi ko dhoomil nahi kar sakta

bahut badhiya lavita hai
badhai ho

सतीश चंद्र सत्यार्थी said...

pahli bar apke blog par aaya. lekin bahut achchha laga. bahut achchha likhte hain aap.
congrats & best of luck

pange said...

han kisi iish ko nhi aapko pradam karna chahiye aap hai hi itneee mahaan.. jai ho mahan atma ..
bhadhai hooo..

स्वदेश जैन said...

भैंस चालीसा
महामूर्ख दरबार में, लगा अनोखा केस
फसा हुआ है मामला, अक्ल बङी या भैंस
अक्ल बङी या भैंस, दलीलें बहुत सी आयीं
महामूर्ख दरबार की अब,देखो सुनवाई
मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस सदा ही अकल पे भारी
भैंस मेरी जब चर आये चारा- पाँच सेर हम दूध निकारा
कोई अकल ना यह कर पावे- चारा खा कर दूध बनावे
अक्ल घास जब चरने जाये- हार जाय नर अति दुख पाये
भैंस का चारा लालू खायो- निज घरवारि सी.एम. बनवायो
तुमहू भैंस का चारा खाओ- बीवी को सी.एम. बनवाओ
मोटी अकल मन्दमति होई- मोटी भैंस दूध अति होई
अकल इश्क़ कर कर के रोये- भैंस का कोई बाँयफ्रेन्ड ना होये
अकल तो ले मोबाइल घूमे- एस.एम.एस. पा पा के झूमे
भैंस मेरी डायरेक्ट पुकारे- कबहूँ मिस्ड काल ना मारे
भैंस कभी सिगरेट ना पीती- भैंस बिना दारू के जीती
भैंस कभी ना पान चबाये - ना ही इसको ड्रग्स सुहाये
शक्तिशालिनी शाकाहारी- भैंस हमारी कितनी प्यारी
अकलमन्द को कोई ना जाने- भैंस को सारा जग पहचाने
जाकी अकल मे गोबर होये- सो इन्सान पटक सर रोये
मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस का गोबर अकल पे भारी
भैंस मरे तो बनते जूते- अकल मरे तो पङते जूते

स्वदेश जैन said...

भैंस चालीसा
महामूर्ख दरबार में, लगा अनोखा केस
फसा हुआ है मामला, अक्ल बङी या भैंस
अक्ल बङी या भैंस, दलीलें बहुत सी आयीं
महामूर्ख दरबार की अब,देखो सुनवाई
मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस सदा ही अकल पे भारी
भैंस मेरी जब चर आये चारा- पाँच सेर हम दूध निकारा
कोई अकल ना यह कर पावे- चारा खा कर दूध बनावे
अक्ल घास जब चरने जाये- हार जाय नर अति दुख पाये
भैंस का चारा लालू खायो- निज घरवारि सी.एम. बनवायो
तुमहू भैंस का चारा खाओ- बीवी को सी.एम. बनवाओ
मोटी अकल मन्दमति होई- मोटी भैंस दूध अति होई
अकल इश्क़ कर कर के रोये- भैंस का कोई बाँयफ्रेन्ड ना होये
अकल तो ले मोबाइल घूमे- एस.एम.एस. पा पा के झूमे
भैंस मेरी डायरेक्ट पुकारे- कबहूँ मिस्ड काल ना मारे
भैंस कभी सिगरेट ना पीती- भैंस बिना दारू के जीती
भैंस कभी ना पान चबाये - ना ही इसको ड्रग्स सुहाये
शक्तिशालिनी शाकाहारी- भैंस हमारी कितनी प्यारी
अकलमन्द को कोई ना जाने- भैंस को सारा जग पहचाने
जाकी अकल मे गोबर होये- सो इन्सान पटक सर रोये
मंगल भवन अमंगल हारी- भैंस का गोबर अकल पे भारी
भैंस मरे तो बनते जूते- अकल मरे तो पङते जूते

अनिल कान्त : said...

baat to bilkul sahi kahi hai aapne

dushyant kumar chaturvedi दुष्यन्त कुमार चतुर्वेदी said...

swadesh ji ne meri ye rachna bhains chalisa adhuri post ki hai,
sampoorn rachna aap ko mere blog per mil jaayegi. sadhanyawad...
dushyant kumar chaturvedi.
http://dushyantkumarchaturvedi.blogspot.com/2007/12/blog-post.html

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