मन के बाग़ में बिखरी है भावनाओं की ओस। …………कुछ बूंदें छूकर मैंने भी नम कर ली हैं हथेलियाँ …………और लोग मुझे कवि समझने लगे!

ब्लॉग से वेबसाइट तक …


प्रिय मित्रों!
मेरी काव्य वाटिका अब पूरे बगीचे का रूप ले चुकी है। अब ब्लॉग की क्यारी में उगी तुलसी वेबसाइट के बगीचे में महक रही है। इस बग़ीचे में आपको विविध क्यारियों की महक और सौंदर्य एक साथ मिलेगा। कृपया ऊपर दिये गए चित्र पर क्लिक करें और हमारे नए घर पधारें-

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